बेघर

सांस लेती ज़िन्दगी
चौराहे पर।
ख़ामोश खड़ी ज़िन्दगी
चौराहे पर।
भागति हुई ज़िन्दगी
चौराहे पर।
नाच उठी अचानक ज़िन्दगी
चौराहे पर।

चौराहे पर खड़ी ज़िन्दगी।
थामे गोद में लिए ज़िन्दगी।
चौराहे पर बैठी ज़िन्दगी
इबादत मे खोजती किस्मत की चाबी।

जीने की तमन्ना लिये आंखों में।
चौराहे पर सिमटी हुई ज़िन्दगी।
घर बसाये बैठी ज़िन्दगी चौराहे पर।
खुले आसमां तले होती गुजर-बसर।

ट्राफिक के प्रकाश की चहल-पहल में
बचपन बीता चौराहे पर।
न जाने कब टूटा जवानी का कहर
चौराहा छोड़ चली
बसाने घर
किसी दूसरे चौराहे पर।

श्रद्धांजलि अटल जी को-चाहे देर से ही सही

एक युग बीत चला।
छोड़ हमें चल दिया।
पंचतत्व में विलीन हुआ।
देश का सपूत अमर हुआ।

कविताएं उनकी रह गई ।
आंखों को छलका गई।
जनसमूह रो पड़ा।
देश का सपूत चल पड़ा।

अटल उनके इरादे थे।
अटल अपने विचार पे।
मनोबल उनका था अटल।
अन्तिम सांस तक अटल।

“देश के लिये करो।
इंसानो से गले मिलो।
कदम मिलाकर चलना सीखो।
गीत नया गाता रहो।”

ज्ञान के भंडार अटल जी।
युगपुरुष थे अटल जी।
मेरे कवि अटल जी।
अमर रहे अटल जी।

मेरे पचास

पचास साल पहले देखा था
ज़िन्दगी तुझको।
मिले थे दोनों
जैसे दो अजनबी।
चशमा लगा के अब पूछता हूं,
बता
तुझे जल्दी तो नही मुझसे बिछड़ने की?
पचास साल का है रिश्ता तुझसे।
कुछ खट्टे
कुछ थे ख्वाब मीठे
ढूंढ निकाला मेरे लिये तु
कितने ही मन बहलाने वाले रिश्ते।
गुरु तू था, तेरी पाठशाला,
लिये तूने कितने इन्तेहा।
अब भी तुझको करता नमन
याद है जो तूने दिया हमें ज्ञयान।
बालों में पता नही कब
तूने चांदी की परत चढ़ाई।
नींदों में आने वाले मिठे सपनों पर
पता नही, कब तुने रोक लगाई?
अभी कुछ फासले और है तय करना।
तू साथी मेरे सफर का,
कुछ धीरे, रुक रुक कर तू चलना।
रास्ते के हर मोड़ पर रुक कर
इन्तजार तू मेरा करना।
तेरे किस्से, तेरी बातें
ऐ जिंदगी , लगती है बड़ी हसीन।
पचास सालों का यह रिश्ता हमारा
तेरी दुआ से इसे मुकम्मल करना।IMG_20180714_205001